अध्याय 112 अकेलापन

एस्ट्रिड ने आँखें घुमा लीं।

ऑलिवर उससे जोंक की तरह चिपका हुआ था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे कैसे झटककर अलग करे। उसने अपनी भावनाएँ काबू में रखने की पूरी कोशिश की और उसे चेतावनी दी।

“ऑलिवर, मेरे काम को लेकर मुझे मत बताओ कि मुझे क्या करना है।”

ऑलिवर को उसके लहजे की घिन ज़रा भी समझ नहीं आई। उल्टा, ...

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